पहले केजरीवाल को गिरफ्तार किया,अब उनकी पार्टी के दफ्तर को सील कर दिया गया। नेता प्रचार नहीं कर सकता और अब पार्टी भी चुनाव नहीं लड़ सकती। पार्टी का दफ्तर सील करने का क्या तुक है? दो साल से इस मामले की जांच चल रही है, क्या अब भी पार्टी का दफ्तर सील किए जाने की ज़रूरत है खासकर तब जब चुनाव शुरू हो चुका है? चुनाव के समय में सभी दलों को पर्याप्त समय मिलता है अपनी अपनी बात रखने का लेकिन अगर केंद्रीय एजेंसियां विरोधी दलों के दफ्तरों को सील करेंगी, नेताओं को जेल में रखेंगी तो फिर चुनाव का क्या मतलब रह जाएगा?
AAP ने दिखाई मनी ट्रेल, दिल्ली दफ़्तर सील | Kejriwal arrested, part: 4
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Art of extracting money from loss-making firms, and more electoral bond stories
Ravish Kumar: अरुण गोयल का चुनाव आयोग से इस्तीफ़ा | Arun Goel resigns from the Election Commission
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