गांधी का समुद्री वर्तुल
Ø दिलीप सिमियन ‘’अपने क्षेत्र की विशिष्टता का आग्रह हमारे जीवन का एक अभिशाप है. हम चाहते हैं कि हमारा क्षेत्र फैल कर भारत की सीमा के साथ मिल जाए और अंततः वह इस पृथ्वी की सीमा तक फैल जाए. और ऐसा नहीं हुआ तो यह नष्ट हो जाएगा.“ — महात्मा गांधी, सितंबर 1947 “सत्य कभी… Read More गांधी का समुद्री वर्तुल
